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मदन पाल सिंह के उपन्यास पर यतीश कुमार की टिप्पणी

मदन पाल सिंह के उपन्यास पर यतीश कुमार की टिप्पणी

फड़फड़ाती जुगुप्सा, निराशा और भय के बीच कहानीः उपन्यास 'हरामी' यतीश कुमार कुछ किताबें शुरुआती पन्नों से ही पाठकों को अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर देती हैं। अपने अलग मिज़ाज़ और...

पंकज मित्र की चर्चित कहानी ‘बेचूलाल का भूत उर्फ बेलाकाभू’

पंकज मित्र की चर्चित कहानी ‘बेचूलाल का भूत उर्फ बेलाकाभू’

बेचूलाल का भूत उर्फ बेलाकाभू पंकज मित्र   पंकज मित्र जब से ‘क़यामत से क़यामत तक’ को ‘क्यू एस क्यू टी’ और ‘दिलवाले दुल्हनिया लेजाएँगे’ को डी डी एल जे कहने का...

हिन्दी का साहित्यिक इतिहास लेखनः डॉ. अजय तिवारी

हिन्दी का साहित्यिक इतिहास लेखनः डॉ. अजय तिवारी

हिन्दी का साहित्यिक इतिहास कैसे लिखें? डॉ. अजय तिवारी     डॉ. अजय तिवारी साहित्य के इतिहास-लेखन को लेकर लंबे समय से चिंता व्यक्त की जाती रही है। पिछले दिनों भारतीय भाषा...

मदन पाल सिंह के उपन्यास ‘हरामी’ का एक दिलचस्प अंश

मदन पाल सिंह के उपन्यास ‘हरामी’ का एक दिलचस्प अंश

    सन्तति, अवतरण और लीलाएँ मदन पाल सिंह   बाबा अलाव के पास खाँसता था। साथ ही सूखे-झुर्रीदार घुटनों पर ठुड्डी टिकाये, दुविधा और ख़ुशी के भँवर में डूबता-उतरता, आग कुरेदने लगता... ...

सुशांत सुप्रिय के कहानी संग्रह पर सुषमा मुनीन्द्र

सुशांत सुप्रिय के कहानी संग्रह पर सुषमा मुनीन्द्र

            समाज की दशा और दिशा – पाँचवी दिशा    सुषमा मुनीन्द्र   सुषमा मुनीन्द्र कविता, कहानी, अनुवाद, कथेतर गद्य जैसी रचनाधर्मिता से अपने रचना संसार को समृद्ध...

सौमित्र की कविताएँ

सौमित्र की कविताएँ

सौमित्र सौमित्र की कविताएँ घर आँगन से होती हुई प्रकृति के विशाल फलक तक तो जाती ही हैं वे उम्मीद और प्रेम सहेजे रखना भी जानती हैं। स्नोतकोत्तर की पढ़ाई के बाद...

कुँवर नारायण के जन्मदिन पर पंकज कुमार बोस का एक महत्वपूर्ण आलेख

आरम्भ का कवि और अन्त का द्रष्टा पंकज कुमार बोस कुँवर नारायण कुँवर नारायण हमेशा एक मनुष्य और कवि के रूप में सार्थकता की तलाश करते रहे, लेकिन जीवन से कभी कोई...

जयशंकर प्रसाद के जीवन-युग पर केंद्रित उपन्यास ‘कंथा’ का एक महत्वपूर्ण अंश

Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI   कंथा  श्याम बिहारी श्यामल सुपरिचित कथाकार श्याम बिहारी श्यामल ने अपनी इस कृति में प्रसाद का जीवन-चित्र तो आँका ही है, बीसवीं सदी...

भरत प्रसाद द्वारा लिखे जा रहे उपन्यास ‘लाल क्षितिज का पक्षी’ का एक रोचक अंश

उपन्यास अंश लाल क्षितिज का पक्षी भरत प्रसाद             जे0एन0यू0 अर्थात् ‘जानते नहीं तुम’ या ‘जीवन को न करो उदास’। चाहो तो जे0एन0यू0 का गूढ़ार्थ ‘‘जाम नहीं है उपेक्षणीय’’। वैसे तो मध्यकालीन...

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