ललन चतुर्वेदी की शीर्षकहीन व अन्य कविताएं
ललन चतुर्वेदी कविता के बारे में एक आग्रह मेरा शुरू से ही रहा है कि रचनाकार का मन कुम्हार के आंवे की तरह होता है – हर समय और हर एक वर्तन...
ललन चतुर्वेदी कविता के बारे में एक आग्रह मेरा शुरू से ही रहा है कि रचनाकार का मन कुम्हार के आंवे की तरह होता है – हर समय और हर एक वर्तन...
विभावरी विभावरी की समझ और संवेदनशीलता से बहुत पुराना परिचय रहा है उन्होंने समय-समय पर अपने लेखन से हिन्दी की दुनिया को सार्थक-समृद्ध किया है। उनकी एक किताब नॉटनल पर आई...
रूपम मिश्र आप लाख पहेलियाँ बुझा लें, दूर की कौड़ी पकड़-पकड़ लाएँ और पाठकों को अपने कवित्व से विस्मित और चकित करते रहें लेकिन यथार्थ को ठीक-ठीक भाषा में मार्मिकता के साथ...
जिहाद प्रेमचंद बहुत पुरानी बात है। हिंदुओं का एक काफिला अपने धर्म की रक्षा के लिए पश्चिमोत्तर के पर्वत-प्रदेश से भागा चला आ रहा था। मुद्दतों से उस प्रांत में हिंदू और...
शहंशाह आलम महत्वपूर्ण कवि एवं समीक्षक हैं। इधर उन्होंने कहानियाँ लिखनी शुरू की हैं। प्रस्तुत है उनकी यह कहानी। आदमी रखने वाला पिंजड़ा ■ शहंशाह आलम मेरे लिए आज की सुबह...
अर्चना लार्क की कविताएँ यत्र-तत्र देखता आया हूँ और उनके अंदर कवित्व की संभावनाओं को भी महसूस किया है लेकिन इधर की उनकी कुछ कविताओं को पढ़कर लगा कि वे लागातार अपने कवि मानस...
नेहा नरूका समकालीन हिन्दी कविता को लेकर मेरे मन में कभी निराशा का भाव नहीं आय़ा। यह इसलिए है कि तमाम जुमलेबाज और पहेलीबाज कविताओं के बीच मुझे लागातार ऐसी कविताएँ पढ़ने-देखने...
आधा डूबा आधा उठा हुआ विश्वविद्यालय भरत प्रसाद ‘चुनाव’ शब्द तानाशाही और अन्याय की दुर्गंध देता है। जबकि मजा यह कि इंसानों से पटी पड़ी दुनिया में खोजना...
सत्ता के बहुभुज का आख्यान ( उदय प्रकाश की कथा सृष्टि से गुजरते हुए ) विनय कुमार मिश्र उदय प्रकाश ‘जिनके मुख देखत दुख उपजत’ --नाभादास भक्त कवि नाभादास को अपने...
अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
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