स्वप्निल श्रीवास्तव स्वप्निल श्रीवास्तव की इन कविताओं का वैशिष्ट्य उनकी सहज भाषा, अनुभवजन्य दृष्टि और जीवन के साधारण प्रसंगों में छिपे गहरे अर्थों को पहचानने की क्षमता में निहित है। वे बिना...
वह जो उनका अक्षय आश्रय है शुभ चक्रबर्ती विल्फ्रेड ओवेन युद्ध में युवा कवि विल्फ्रेड ओवेन की असामयिक मृत्यु के बाद उनकी माँ, सुज़ैन एच. ओवेन ने एक बार रवींद्रनाथ को एक...
सब से कठिन और कंटीला सवाल ---- हिंदी का अधिकतर लेखक हिंदी का पाठक क्यों नहीं रहा! यह तो चित्रगुप्त ही जानते हैं कि पहले कौन गया ---- लेखक गया या...
संदीप तोमर ‘वह भागी थी’ केवल किसी लड़की के घर छोड़ देने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस समाज की परतों को खोलने वाली कथा है जहाँ प्रेम, स्वतंत्रता, भय, सामाजिक...
चन्दन कुमार चन्दन कुमार की कविताओं में समकालीन सामाजिक-राजनीतिक यथार्थ के प्रति तीखा प्रतिरोध दिखाई देता है। कवि का मूल सरोकार समानता, स्त्री-मुक्ति, जाति-विरोध, लोकतांत्रिक अधिकार और सामाजिक न्याय से जुड़ा हुआ...
लैंगस्टन ह्यूज़ (1901-1967) लैंगस्टन ह्यूज़ (1901-1967) हार्लेम पुनर्जागरण के एक प्रमुख व्यक्ति थे, जो 1920 के दशक में कई अमेरिकी शहरों, विशेष रूप से हार्लेम में हुए अश्वेत बौद्धिक, साहित्यिक और कलात्मक...
अपने वितान में पाँच दशकों से भी अधिक समय को समेटे हुए मौजूदा हिन्दी कविता आधुनिक काल के सबसे लंबे कालखंड की यात्रा है। यह न केवल साढ़े पाँच दशकों की...
प्रतिरोध, स्त्री-अस्मिता और सामाजिक विवेक का कविता-संसार हरे प्रकाश उपाध्याय समकालीन हिंदी कविता में स्त्री के अनुभवों, उसकी सामाजिक स्थिति और उसके आत्मसम्मान को केंद्र में रखकर लिखी गई कविताओं की एक...
अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2009-2022 अनहद कोलकाता by मेराज.