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सुशांत सुप्रिय की कविताएँ

सुशांत सुप्रिय की कविताएँ

  सुशांत सुप्रिय सुशांत सुप्रिय की इन कविताओं का केंद्रीय स्वर अपने समय की राजनीतिक विडंबनाओं, सामाजिक विसंगतियों, मनुष्य के आंतरिक विखंडन और संवेदनहीन होते समाज के विरुद्ध एक सजग प्रतिरोध का...

​ऐनी कार्सन का पेरिस रिव्यु पत्रिका के लिए लिया गया साक्षात्कार

​ऐनी कार्सन का पेरिस रिव्यु पत्रिका के लिए लिया गया साक्षात्कार

यह अनुवाद प्रतिष्ठित पत्रिका पेरिस रिव्यु से साभार लिया गया है। यह साक्षात्कार विल ऐटकिन ने साल 2002 में लिया था। अनुवाद: शुभ चक्रबर्ती   ANNE CARSAN ​ऐनी कार्सन और मेरी पहली मुलाकात...

स्वप्निल श्रीवास्तव की कविताएँ

स्वप्निल श्रीवास्तव की कविताएँ

स्वप्निल श्रीवास्तव स्वप्निल श्रीवास्तव की इन कविताओं का वैशिष्ट्य उनकी सहज भाषा, अनुभवजन्य दृष्टि और जीवन के साधारण प्रसंगों में छिपे गहरे अर्थों को पहचानने की क्षमता में निहित है। वे बिना...

वह जो उनका अक्षय आश्रय है : शुभ चक्रबर्ती

वह जो उनका अक्षय आश्रय है : शुभ चक्रबर्ती

वह जो उनका अक्षय आश्रय है शुभ चक्रबर्ती विल्फ्रेड ओवेन ​युद्ध में युवा कवि विल्फ्रेड ओवेन की असामयिक मृत्यु के बाद उनकी माँ, सुज़ैन एच. ओवेन ने एक बार रवींद्रनाथ को एक...

लोचन कोना – तीसरी किस्त – प्रफुल्ल कोलख्यान

लोचन कोना – तीसरी किस्त – प्रफुल्ल कोलख्यान

  सब से कठिन और कंटीला सवाल ---- हिंदी का अधिकतर लेखक हिंदी का पाठक क्यों नहीं रहा! यह तो चित्रगुप्त ही जानते हैं कि पहले कौन गया ---- लेखक गया या...

वह भागी थी

वह भागी थी

संदीप तोमर ‘वह भागी थी’ केवल किसी लड़की के घर छोड़ देने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस समाज की परतों को खोलने वाली कथा है जहाँ प्रेम, स्वतंत्रता, भय, सामाजिक...

चन्दन कुमार की कविताएँ

चन्दन कुमार की कविताएँ

चन्दन कुमार चन्दन कुमार की कविताओं में समकालीन सामाजिक-राजनीतिक यथार्थ के प्रति तीखा प्रतिरोध दिखाई देता है। कवि का मूल सरोकार समानता, स्त्री-मुक्ति, जाति-विरोध, लोकतांत्रिक अधिकार और सामाजिक न्याय से जुड़ा हुआ...

लैंगस्टन ह्यूज़ की कविताएँ

लैंगस्टन ह्यूज़ की कविताएँ

लैंगस्टन ह्यूज़ (1901-1967) लैंगस्टन ह्यूज़ (1901-1967) हार्लेम पुनर्जागरण के एक प्रमुख व्यक्ति थे, जो 1920 के दशक में कई अमेरिकी शहरों, विशेष रूप से हार्लेम में हुए अश्वेत बौद्धिक, साहित्यिक और कलात्मक...

मज्झिम प्रतिपदा

मज्झिम प्रतिपदा

  अपने वितान में पाँच दशकों से भी अधिक समय को समेटे हुए मौजूदा हिन्दी कविता आधुनिक काल के सबसे लंबे कालखंड की यात्रा है। यह न केवल साढ़े पाँच दशकों की...

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