भोर होने से पहले : राकेश कुमार सिंह
वरिष्ठ एवं चर्चित कथाकार राकेश कुमार सिंह की यह कहानी पलामू के जंगल-पठार, आदिवासी जीवन और ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की...
वरिष्ठ एवं चर्चित कथाकार राकेश कुमार सिंह की यह कहानी पलामू के जंगल-पठार, आदिवासी जीवन और ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की...
लोचन कोना (अनहद कोलकाता के साप्ताहिक कॉलम — लोचन कोना — की बुनियादी टिप्पणी) लोचन जलु रह लोचन कोना, जैसे...
पहाड़ी लोक परंपरा को आधुनिकता से जोड़ता हुआ कविता संग्रह देवेश पथ सारिया उत्तराखंड के वरिष्ठ कवि भूपेंद्र बिष्ट का...
अनिल गंगल इन कविताओं की प्रमुख विशेषता यह है कि कवि बड़े प्रश्नों को घोषणात्मक वैचारिकता के बजाय रोज़मर्रा के...
शिवानी शांतिनिकेतन शिवानी ‘शांतिनिकेतन’ की यह कहानी केवल एक बेटी के अपने मायके लौटने भर की कथा नहीं कहती, बल्कि...
पल्लवी त्रिवेदी पल्लवी त्रिवेदी की इन कविताओं की बड़ी विशेषता यह है कि इनमें दैनिक जीवन के बेहद साधारण अनुभवों...
नई कविताएँ : अदनान कफ़ील दरवेश अदनान कफ़ील दरवेश अदनान कफ़ील दरवेश की ये नई कविताएँ अपने समय, समाज...
भरत प्रसाद 'मज्झिम प्रतिपदा' भरत प्रसाद जी के द्वारा हर महीने के पहले शनिवार को प्रस्तुत किया जाने वाला एक नवीनतम...
वर्ग-लोकतंत्र का भंडाफोड़ : लेनिन की ‘राज्य और क्रांति’ के सबक - वंदना वंदना राज्य, सत्ता और क्रांति जैसे...
जुवि शर्मा जुवि शर्मा की ‘अबोली की डायरी’ एक ऐसी स्त्री के अंतर्मन की यात्रा है, जो रिश्तों, उपेक्षा, अवसाद,...
अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2009-2022 अनहद कोलकाता by मेराज.