समीक्षा-समीक्षा – आदित्य विक्रम सिंह
उम्मीद की यात्राआदित्य विक्रम सिंह युवा कवि विमलेश त्रिपाठी की कविताओं को हम पिछले कुछ वर्षों से प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में लगातार पढ़ते आ रहे हैं। अभी हाल में उनकी कविताओं का मुकम्मल...
उम्मीद की यात्राआदित्य विक्रम सिंह युवा कवि विमलेश त्रिपाठी की कविताओं को हम पिछले कुछ वर्षों से प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में लगातार पढ़ते आ रहे हैं। अभी हाल में उनकी कविताओं का मुकम्मल...
निशांत प्रेम-और बेरोजगारी के कवि के रूप में काफी लोकप्रिय हुए थे। सत्ताईस साल की उम्र में कविता पर उन्हें प्रतिष्ठित भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। उनकी कविता की एक किताब...
आत्महत्या को ह्त्या की तरह देखा जाना चाहिए एकांत श्रीवास्तव का देवास में एकल कविता पाठसंदीप नाईक की एक रपटसुनना, गुनना और बोलना हमारी परम्परा ही नहीं बल्कि संस्कृति का एक अभिन्न अंग है. हमारे मालवे...
महत्वपूर्ण कवि-कथाकार अशोक कुमार पाण्डेय का आज जन्मदिन है। उन्हें जन्मदिन की ढेर सारी बधाइयां-शुभकामनाएं... इस अवसर पर अनहद पर उनकी एक कविता पढ़ते हैं.....रोने की जगह मुस्करा रही थी वह लड़की....वह...
मिथिलेश कुमार रायमिथिलेश कुमार राय की कविताएं इधर कई पत्रिकाओं में छपकर आई हैं। उनकी कविताओं में एक तरह की सहजता है जिसे कस्बाई और महानगरीय जीवन बोध ने लीलना शुरू कर...
विमलेश रोज बन रही दुनिया के आदिवासी कवि हैं ...
लोक की जमीन से जुड़ी कविताएंतारिका सिंहशोध सहायिका, संस्कृत एवं प्राकृत भाषा विभाग,लखनऊ विश्वविद्यालयसंपर्कः09451216430 इधर की समकालीन कविता में कवियों का लोक से जुड़ाव और लोक से उनके रिश्ते में कमी आई...
उम्मीद की कविता -आर.सी. पांडेयहम बचे रहेंगे – विमलेश त्रिपाठी {कविता संग्रह}'नयी किताब',एफ-3/78-79, सेक्टर-16, रोहिणी, दिल्ली - 110089.दूरभाष ः 011-27891526इ-मेल ः nayeekitab@gmail.comISBN 978-81-908197-5-6'हम बचे रहेंगे’ युवा कवि विमलेश त्रिपाठी का पहला काव्य संग्रह है। उनकी कविता उदासी को तोड़ती हुइ...
संदीप प्रसाद की कविताएं अनहद पर हम पहले भी प्रस्तुत कर चुके हैं। संदीप इस बार अपनी कुछ ताजा-तरीन कविताओं के साथ हमारे बीच फिर से उपस्थित हैं। इन कविताओं में एक...
अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
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