कविता की कहानी
कविताकविता जी की कहानियों में शिल्प की जहां सहजता है वहीं समय की जटिलता भी है। सहज शिल्प और बोधगम्य भाषा में अपनी बात को प्रभावी ढंग से कहना आज के किसी...
कविताकविता जी की कहानियों में शिल्प की जहां सहजता है वहीं समय की जटिलता भी है। सहज शिल्प और बोधगम्य भाषा में अपनी बात को प्रभावी ढंग से कहना आज के किसी...
विमल चंद्र पाण्डेय -9820813904विमल का मेरे लिए परिचय बस इतना है कि वे यारों के यार हैं। मुझे याद आता है 2004 का वह साल जब पहली बार मेरी और उनकी भी...
संतोष अलेक्ससंतोष अलेक्स की हिंदी कविताएं यत्र-तत्र पत्रिकाओं में छपती रहती हैं। उनका कविताओं के क्षेत्र में किया गया अनुवाद का काम उल्लेखनीय है। यहां प्रस्तुत कविताएं अपने तरह की बिल्कुल अलग...
अमित आनंदअमित आनंद का परिचय इसलिए भी देना जरूरी है क्योंकि वे पहली बार किसी ब्लॉग पर अपनी कविताओं के साथ उपस्थित हैं। उनकी कविताएं पढ़ते हुए हम एक ऐसी दुनिया में...
कृष्णकांतकृष्णकांत की कहानियां इधर कई पत्रिकाओं में छपी हैं। उनकी यह कहानी ग्रामीण परिवेश में हो रहे स्त्रियों के शोषण और उनके संघर्ष को केन्द्र में रखकर लिखी गई है। कहानी की...
हिंदी कविता का समाज शास्त्रप्रफुल्ल कोलख्यान`साहित्य आज अनेक प्रकार के पाठकों, श्रोताओं को संबोधित करता है। अनेक प्रकार के उद्देश्यों एवं प्रयोजनों के लिए काम करता है। ऐसी स्थिति में इस अनेकधा...
प्रदीप सैनीहाल के वर्षों में अपनी अच्छी कविताओं से सक्रिय और मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने वाले कवियों में प्रदीप सैनी का नाम प्रमुखता से लिया जाना चाहिए। प्रदीप सैनी की कविताओं को...
केशव तिवारीसमकालीन कविता के कुछ स्वर जहां पहेलियों और मुकरियों में बदलते जा रहे हैं वहीं कुछ कवियों के स्वर ऐसे भी हैं जो लोक की जमीन पर खड़े होकर आसमान को...
शैलजा पाठकशैलजा की कविताएं फेसबुक पर लागातार पढ़ने को मिल रही हैं, और अपने अलग अंदाज और कहन के अलहदेपन से लोगों को बहुत प्रभावित भी कर रही हैं। इनकी कविताओं में...
अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
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