LATEST BLOG

कविता

जैसे एक लाल-पीलीतितलीबैठ गई होकोरे कागज पर नीर्भिकयाद दिला गई होबचपन के दिन....

वैसे ही आऊँगा

मंदिर की घंटियों की आवाज के साथरात के चौथे पहरजैसे पंछियों की नींद को चेतना आती हैकिसी समय के बवडर मेंखो गएकिसी बिसरे साथी केजैसे दो अदृश्य हाथउठ आते हैं हार गए...

Page 24 of 24 1 23 24