संजीव बख्शी की लंबी कविता – बस्तर का हाट
कवि-कथाकार संजीव बख्शी पिछले कई दशकों से कविता में सक्रिय रहे हैं। उनके लागातार आ रहे संकलन कविता में उनकी गहरी...
कवि-कथाकार संजीव बख्शी पिछले कई दशकों से कविता में सक्रिय रहे हैं। उनके लागातार आ रहे संकलन कविता में उनकी गहरी...
कविताकविता जी की कहानियों में शिल्प की जहां सहजता है वहीं समय की जटिलता भी है। सहज शिल्प और बोधगम्य...
विमल चंद्र पाण्डेय -9820813904विमल का मेरे लिए परिचय बस इतना है कि वे यारों के यार हैं। मुझे याद आता...
संतोष अलेक्ससंतोष अलेक्स की हिंदी कविताएं यत्र-तत्र पत्रिकाओं में छपती रहती हैं। उनका कविताओं के क्षेत्र में किया गया अनुवाद...
अमित आनंदअमित आनंद का परिचय इसलिए भी देना जरूरी है क्योंकि वे पहली बार किसी ब्लॉग पर अपनी कविताओं के...
कृष्णकांतकृष्णकांत की कहानियां इधर कई पत्रिकाओं में छपी हैं। उनकी यह कहानी ग्रामीण परिवेश में हो रहे स्त्रियों के शोषण...
हिंदी कविता का समाज शास्त्रप्रफुल्ल कोलख्यान`साहित्य आज अनेक प्रकार के पाठकों, श्रोताओं को संबोधित करता है। अनेक प्रकार के उद्देश्यों...
प्रदीप सैनीहाल के वर्षों में अपनी अच्छी कविताओं से सक्रिय और मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने वाले कवियों में प्रदीप सैनी...
केशव तिवारीसमकालीन कविता के कुछ स्वर जहां पहेलियों और मुकरियों में बदलते जा रहे हैं वहीं कुछ कवियों के स्वर...
शैलजा पाठकशैलजा की कविताएं फेसबुक पर लागातार पढ़ने को मिल रही हैं, और अपने अलग अंदाज और कहन के अलहदेपन...
अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2009-2022 अनहद कोलकाता by मेराज.