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Home अनुवाद

लैंगस्टन ह्यूज़ की कविताएँ

अनुवाद - योगेश ध्यानी

by Anhadkolkata
October 4, 2026
in अनुवाद, साहित्य
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सुरेन्द प्रजापति की कविताएँ

लैंगस्टन ह्यूज़ (1901-1967)

लैंगस्टन ह्यूज़ (1901-1967) हार्लेम पुनर्जागरण के एक प्रमुख व्यक्ति थे, जो 1920 के दशक में कई अमेरिकी शहरों, विशेष रूप से हार्लेम में हुए अश्वेत बौद्धिक, साहित्यिक और कलात्मक जीवन के उत्कर्ष का प्रतीक था। एक प्रमुख कवि होने के साथ-साथ, ह्यूज़ ने उपन्यास, लघु कथाएँ, निबंध और नाटक भी लिखे। उन्होंने भावुक आदर्शवाद और नकारात्मक रूढ़ियों से बचते हुए, मेहनतकश अश्वेतों के जीवन की खुशियों और कठिनाइयों को ईमानदारी से चित्रित करने का प्रयास किया।

 

Harlem / हार्लेम

 

एक स्थगित स्वप्न का क्या होता है
क्या वह सूख जाता है
धूप में किशमिश की तरह ?
या घाव की तरह पक जाता है
और तब भागता है?

क्या यह सड़े मांस की तरह महकता है
या चाशनी पर
चीनी की पपड़ी सा जम जाता है?

शायद झूल जाता है वह
भारी वजन की तरह ।

या फिर

क्या वह फूट जाता है ?

 

Remember /याद करो

 

याद करो
गुलामी के दिनों को
और याद करते हुए
बैठे मत रहो
सबसे ऊंचे पर्वत पर जाओ
और नीचे शहर को देखो
जहाँ तुम अब भी एक दास हो।

देखो नीचे कैरोलीना के किसी भी शहर में
या मैने के किसी भी शहर को
या फिर अफ्रीका, तुम्हारी मातृभूमि-
और तुम वह देखोगे जो मैं तुम्हें दिखाना चाहता हूँ-

श्वेत हाथ
चोरी करते हाथ
श्वेत चेहरा
झूठ बोलता चेहरा
श्वेत ताकत
निर्लज्ज ताकत
जो तुम्हें वह भूखी घृणित चीज बनाती है
जो तुम आज हो।

 

The Negro speaks of rivers / नीग्रो नदियों की बात करता है

 

मैंने नदियों को जाना है:
इस संसार की तरह प्राचीन
और मनुष्य की धमनियों में
मानव रक्त के बहाव- सी पुरानी
मैंने नदियों को जाना है

मेरी आत्मा नदियों की गहराई की तरह बड़ी हुई है।

जब सुबहें जवान थीं मैं महानदियों में नहाया
मैंने कांगों के पास अपनी झोपड़ी बनाई
और इसने मुझे सुलाया
मैंने नीचे नील की तरफ देखा और
इसके ऊपर पिरामिड बनाये

मैंने मिसीसिपी को गाते सुना जब
आबे लिंकन न्यू ऑरलीन्स गये, और मैंने
इसकी दलदली छाती को सूर्यास्त में
पूरा सुनहरा होते देखा

मैंने नदियों को जाना है
प्राचीन और उदास नदियों को

मेरी आत्मा नदियों की गहराई की तरह बड़ी हुई है।

 

I look at the world / मैं दुनिया को देखता हूँ 

 

मैं दुनिया को देखता हूँ
काले चेहरे पर जागती आँखों से-
और जो देखता हूं वह कि
मुझे दी गयी
बाड़ से घिरी यह छोटी संकरी जगह

फिर मैं मूर्ख दीवारों को देखता हूँ
काले चेहरे पर काली आँखों द्वारा –
और जो मैं जान पाता हूँ वह कि
दमन का निर्माण करती हुई
इन सारी दीवारों को हटना होगा।

मैं अपने शरीर को देखता हूँ
उन आँखों से जो अब अंधी नहीं हैं
और मैं देखता हूँ कि मेरे अपने हाथ
उस संसार को बना सकते हैं
जो मेरे मस्तिष्क में है।

तो जल्दी करो, कॉमरेड
हमें राह ढूंढनी है।

 

Sea calm /समुद्र की शांति

 

कितना शान्त
कितना अजीब शान्त
पानी है आज

यह नहीं ठीक
पानी के लिये
होना इस तरह
इतना शान्त।

 

Dust bowl /डस्ट बाउल

 

ज़मीन चाहती है मेरी वापसी
शरद की मुट्ठीभर धूल में
वसंत में मेरे हाथ की हथेली पर
वर्षा की एक बूँद में
ज़मीन चाहती है मेरी वापसी
अक्टूबर के एक टूटे हुए गीत में
एक उड़ते हुए हिमपक्षी में
ज़मीन चाहती है मेरी वापसी।

 

Suicide’s Note / सुसाइड नोट

 

नदी के शान्त, ठंडे मुख ने
मुझसे निवेदन किया
एक चुम्बन के लिये।

 

Sailor / नाविक

 

घर से आधी दुनिया दूर
हिलते हुए डेक पर बैठा
उसने कैप्सटन सिगरेट पी
और फेन युक्त नीली लहरों को देखा

उसके बाजुओं पर जलपरी थी
उसकी छाती पर लंगर था

और उसकी पीठ पर
एक पिंजरे में

एक नीली चिड़िया वाला
टैटू था।

 

°°°°°

 

अनुवादक का परिचय: 

योगेश ध्यानी
जन्मतिथि- 3 सितम्बर 1983
सम्प्रति – मैरीन इंजीनियर
निवास – कानपुर
मोबाइल – 9336889840
इमेल – yogeshdhyani85@gmail.com

योगेश ध्यानी

परिचय – साहित्य मे छात्र जीवन से रुचि,
हंस, वागर्थ,आजकल, परिन्दे, कादम्बिनी, कृति बहुमत, बहुमत , प्रेरणा अंशु, देशधारा, अन्वेषा आदि पत्रिकाओं मे कविताएं प्रकाशित
हिन्दवी, पोषम पा, जानकीपुल, इन्द्रधनुष, अनुनाद, कृत्या, इरा वेब पत्रिका , लिखो यहां वहां, बिजूका, नवरूपभ, मलोटा फोक्स, कथान्तर-अवान्तर, हमारा मोर्चा आदि साहित्यिक वेब साइट्स पर कविताएं तथा लेख प्रकाशित
प्लूटो, किस्सा कोताह, प्रेरणा अंशु तथा शतरूपा पत्रिकाओं तथा जानकीपुल और वाग्मी की वेबसाइट पर बाल कहानियां प्रकाशित

नोशनप्रेस की कथाकार पुस्तक मे सन्दूक कहानी चयनित, एक अन्य कहानी गाथान्तर पत्रिका मे प्रकाशित, किस्सा कोताह में कहानी तथा लघुकथा प्रकाशित

ट्रिब्यून समाचार पत्र, जानकीपुल वेबसाइट, हिन्दवी बेला, वनप्रिया पत्रिका तथा टाॅक थ्रू वेबसाइट पर फिल्म आधारित कुछ लेख प्रकाशित

देशज पत्रिका तथा अनुनाद ई पत्रिका में लेख प्रकाशित
सदानीरा, पोषम पा तथा अनुनाद वेबसाइट पर कुछ विश्व कविताओं के अनुवाद प्रकाशित

कृति बहुमत, परिन्दे तथा आधारशिला साहित्यम पत्रिकाओं और अनुनाद ई पत्रिका मे विश्व कहानियों के हिन्दी अनुवाद प्रकाशित
समुद्र पर आधारित कविताओं की दो किताबें “समुद्रनामा” तथा “समुद्रनामा 2” प्रकाशित हुई हैं।

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अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।

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