मज्झिम प्रतिपदा -3- भरत प्रसाद
मज्झिम प्रतिपदा -3- भरत प्रसाद पिछले करीब 50 वर्षों से हिन्दी साहित्य "समकालीनता" की धारा में बहता चला जा रहा ...
अनहद कोलकाता पूर्णतः अव्यवसायिक एक बेव पत्रिका है जो साहित्य संस्कृति आदि को समर्पित है।
मज्झिम प्रतिपदा -3- भरत प्रसाद पिछले करीब 50 वर्षों से हिन्दी साहित्य "समकालीनता" की धारा में बहता चला जा रहा ...
राहुल झा राहुल झा की इन कविताओं में स्मृति, अनुपस्थिति, स्पर्श और दृश्य के भीतर छिपी मनुष्यता की एक बेहद ...
समकालीन वैश्विक बहस में यह प्रश्न और जटिल हुआ है। यौन उत्पीड़न, नस्लवाद, स्त्री-विरोध, राजनीतिक दमन अथवा अन्य अनैतिक आचरण ...
नवीन रांगियाल नवीन रांगियाल की इन कविताओं में प्रेम, विरह, स्मृति, अकेलेपन और मृत्यु के अनुभवों से गुजरते हुए जीवन ...
लोचन कोना-7 — प्रफुल्ल कोलख्यान प्रेमचंद के विचार से — साहित्य अपने सर्वोत्तम रूप में जीवन की आलोचना है। हमारी ...
मृत्युंजय प्रभाकर मृत्युंजय प्रभाकर की ये कविताएँ वर्तमान समाज, राजनीति और मनुष्य के अंतर्विरोधों की गहरी पड़ताल करती हैं। उनकी ...
अखंड भारत से खंडित समाज तक : वर्णव्यवस्था की भूमिका — नन्दलाल भारती नन्दलाल भारती सभ्यता का गौरव और समाज ...
सत्यनारायण पटेल सत्यनारायण पटेल की कहानी ‘ब्रॉउन कुमार’ समकालीन भारतीय समाज, राजनीति और व्यवस्था के अंतर्विरोधों को तीखे व्यंग्य के ...
केशव शरण केशव शरण की इन कविताओं में जीवन के साधारण अनुभवों, प्रकृति की सहज लय, प्रेम की आत्मीयता और ...
सत्य प्रकाश ध्रुव सत्य प्रकाश ध्रुव की कविताओं में स्मृति, प्रेम, विरह, घर और लौटने की आकांक्षा जैसे जीवन के ...
अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
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