वीरू सोनकर की पन्द्रह कविताएँ
वी रू वीरू सोनकर की कविताएँ प्रचुर ऊर्जा से भरी हैं और उनमें धरती की चिंता समाहित है। यही कारण है कि धरती उनका प्रिय शब्द है। वीरू अपनी पीढ़ी में इस कारण...
वी रू वीरू सोनकर की कविताएँ प्रचुर ऊर्जा से भरी हैं और उनमें धरती की चिंता समाहित है। यही कारण है कि धरती उनका प्रिय शब्द है। वीरू अपनी पीढ़ी में इस कारण...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI समकालीन जीवन के साथ नए डिस्कोर्स से पैदा हुई कविताएँ Ø संजय राय एक श्रेष्ठ रचना उन तत्त्वों को पकड़ती है जो सर्वाधिक...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI MicrosoftInternetExplorer4 मंजूषा नेगी पाण्डेयमंजूषा नेगी पाण्डेयकी खासियत यह है कि उनकी अभिव्यक्ति बेहद इमानदार है – वहाँ बनावटीपन देखने को नहीं मिलता जो इधर...
अश्वत्थामा पुन: पुन:योगिता यादवयोगिता यादवहोटल के कमरे से निकलकर मैं सीधे निचले तल पर बने जिम में चला गया। यहां लगभग एक घंटा व्यायाम करने के बाद मैं स्विमिंग पूल के पास...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI MicrosoftInternetExplorer4 राकेश रोहितराकेश रोहित युवा कविता के क्षेत्र में एक जाना-पहचाना नाम है। अपनी कविताओं से लागातार हस्तक्षेप कर रहे इस कवि में एक...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI अनुभूतियों के जनमूर्तिकार : भगवत रावत भरत प्रसादभगवत रावतकविवर ! जन समूह के साधुवाद से भ्रान्त न हो जाना उनकी करतल ध्वनि की गूँजें...
शंकरानंदपिछले कुछ वर्षों में शंकरानंद ने अपनी लागातार सक्रियता से हिन्दी युवा कविता के संसार में उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज की है। गौरतलब है कि कवि के पास अपनी एक भाषा तो है...
जुनैद की हिमायत मेंप्रो. जगदीश्वर चतुर्वेदीप्रो. जगदीश्वर चतुर्वेदीआरएसएस और उनके समर्थकों में गजब की क्षमता है कह रहे हैं आरएसएस के बारे में ´षडयंत्र´के रुप में न देखें, हर घटना में न...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI अदनान कफ़ील दरवेशअदनान कफ़ील दरवेश की बहुत कम कविताएं अब तक हमारे सामने आई हैं लेकिन उन कविताओं के ताप ने हमें गहरे कहीं...
अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
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