क्यों देखनी चाहिए पंचलैट – स्मिता गोयल एवं यतीश कुमार
पंचलैट - साहित्य को सिनेमा को करीब लाने का एक साहसिक प्रयासस्मिता गोयलयतीश कुमारआंचलिक भाषा और हिंदी साहित्य के अमर कथा शिल्पी फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी पंचलाइट पर बनी फिल्म 'पंचलैट' १७...
पंचलैट - साहित्य को सिनेमा को करीब लाने का एक साहसिक प्रयासस्मिता गोयलयतीश कुमारआंचलिक भाषा और हिंदी साहित्य के अमर कथा शिल्पी फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी पंचलाइट पर बनी फिल्म 'पंचलैट' १७...
Normal 0 false false false false EN-US X-NONE HI पथरीले समय में ऐसे आता था त्रेतायुग !विमलेन्दु -------------------------------यह उन दिनों की बात थी जब देश में दूरदर्शन नहीं था और सिनेमा...
मनोज कुमार पांडेयमेरे लिए वे कथाकार बाद में हैं – दोस्त पहले हैं। 2004 में दोस्ती तब शुरू हुई थी जब मेरी कहानी पढ़कर फोन किया। तब से कई मुलाकाते हैं और...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI आशिक़-ए-रसूलशहादतAdd caption “ये लोग जो एक छोटी सी बात का बतंगड़ बनाकर अपनी धार्मिक भावनाओं के आहत होने की शिकायत कर रहे है ना,...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI MicrosoftInternetExplorer4 क्या प्रेमचंद की कोई परंपरा नहीं है?विमलेन्दु प्रेमचंद हिन्दी साहित्य के तोरण-द्वार हैं. कोई भी पाठक जब हिन्दी साहित्य के प्रति प्रेमोन्मुख होता...
हरिशंकर परसाईइसमें दो राय नहीं कि हरिशंकर परसाई ने व्यंग्य विधा को न केवल स्थापित किया वरन उसे असाधारण ऊंचाई तक पहुँचाया। लेकिन यह दिलचस्प है कि उन्होंने कविताएँ भी लिखी थीं।...
संदीप प्रसाद संदीप प्रसाद की कविताएँ बहुत पहले हम अनहद कोलकाता पर पढ़ चुके हैं। बहुत समय बाद उनकी यह कविताएँ अनहद पर प्रकाशनार्थ आई हैं और हमें इस कवि के प्रति...
रश्मि भारद्वाजहाल के वर्षों में अपनी कविताओं के मार्फत हिन्दी जगत का ध्यान आकृष्ठ करने में जिन कवियों ने महत्त सफलता अर्जित की है उनमें रश्मि भारद्वाज प्रमुख नाम है। कहने की...
लिपस्टिक अंडर माय बुरका भारतीय सिनेमा और समाज के लिए बेहद जरूरी फिल्म - शिवानी गुप्तालिपस्टिक अंडर माय बुरकाभोपाल की चार स्त्रियों को केन्द्र में रख कर चलती फिल्म है जिसमें चार...
अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2009-2022 अनहद कोलकाता by मेराज.