यतीश कुमार की कविताएँ
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI यतीश कुमार Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI यतीश कुमार की कविताएँ इस लिए रूहानी लगती हैं क्योंकि इनके कवि को कृत्रिमता...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI यतीश कुमार Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI यतीश कुमार की कविताएँ इस लिए रूहानी लगती हैं क्योंकि इनके कवि को कृत्रिमता...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI MicrosoftInternetExplorer4 मदारीपुर जंक्शन : बालेन्दु द्विवेदीव्यंग्यात्मक उपन्यासों की कड़ी में एक और सशक्त किस्सागोईओम निश्चलकभी ‘राग दरबारी’ आया था तो लगा कि यह एक...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI सुशील मानवसुशील मानव की कविताएँ बहुत धीमे और चुपचाप कथा कहती हुई-सी लगती हैं और एक समय अपने गिरफ्त में ले लेती हैं। इस...
कविता जीवन-विवेक है - अच्युतानंद मिश्र Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI (1) नई सदी में युवाओं की कविता को आप किस दृष्टि से देखते हैं ?कविता के लिहाज़ से...
अंकिता रासुरी उन कुछ युवतर कवियों में हैं जो अनुभव और स्मृतियों को उम्दा कविता में ढालती हैं। इस प्रक्रिया में वे जाहिर तौर पर अपने अध्ययन और चिंतन का भी इस्तेमाल...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI किसी समाज में कविता का बचा होना मनुष्यता के बचे होने का प्रमाण हैविमलेश त्रिपाठी नई सदी की युवा कविता पर कुछ भी कहने...
पंचलैट - साहित्य को सिनेमा को करीब लाने का एक साहसिक प्रयासस्मिता गोयलयतीश कुमारआंचलिक भाषा और हिंदी साहित्य के अमर कथा शिल्पी फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी पंचलाइट पर बनी फिल्म 'पंचलैट' १७...
Normal 0 false false false false EN-US X-NONE HI पथरीले समय में ऐसे आता था त्रेतायुग !विमलेन्दु -------------------------------यह उन दिनों की बात थी जब देश में दूरदर्शन नहीं था और सिनेमा...
अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2009-2022 अनहद कोलकाता by मेराज.