भरत प्रसाद द्वारा लिखे जा रहे उपन्यास ‘लाल क्षितिज का पक्षी’ का एक रोचक अंश
उपन्यास अंश लाल क्षितिज का पक्षी भरत प्रसाद जे0एन0यू0 अर्थात् ‘जानते नहीं तुम’ या ‘जीवन को न करो उदास’। चाहो तो जे0एन0यू0 का गूढ़ार्थ ‘‘जाम नहीं है उपेक्षणीय’’। वैसे तो मध्यकालीन...

