फ़रीद ख़ाँ की नई कविताएँ
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI फ़रीद ख़ाँकुछ कवियों ने हिन्दी कविता को एक अलग पहचान दी है। फ़रीद ख़ाँ का नाम उनमें प्रमुख है – इनकी कविताएँ घर और...
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Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI राकेश रोहित Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI MicrosoftInternetExplorer4 राकेश रोहित कविता की दुनिया में दो दशकों से सक्रिय रहे हैं –...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI MicrosoftInternetExplorer4 अखिलेश्वर पांडेयअखिलेश्वर पांडेय की कविताओं में माटी की सुगंध तो है ही बोलियों के शब्दों का यथोचित और मार्मिक प्रयोग चकित करता है...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI भारतीय अमूर्तता के अग्रज चितेरे : रामकुमारपंकज तिवारीभारतीय चित्रकला यहाँ की मिट्टी और जनजीवन की उपज है। इसमें उपस्थित सभी तत्व भारतीय है। उनपर...
Normal 0 false false false false EN-US X-NONE HI विमलेन्दु के गल्पमैं सोशल मीडिया पर, प्रिन्ट मीडिया का कवि हूँ ! --हाँ, मैं कवि-लेखक हूँ. अपने को विशिष्ट, ऊपर और सुरक्षित बनाने के...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI तुषार धवलतुषार धवल की ये कविताएँ बहुत प्यार और गंभीरता के साथ पढ़ने की माँग करती हैं – 'पहर यह बेपहर का' का कवि...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI MicrosoftInternetExplorer4 कम्प्युटर युग में हिन्दीप्रो.जगदीश्वर चतुर्वेदीसरकार की आदत है वह कोई काम जलसे के बिना नहीं करती। सरकार की नजर प्रचार पर होती है...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI स्याह की धुंध में उपजी कथाओं का लोक : मुक्तिबोध की कहानियाँडॉ0 शिवानी जीवन जिसके...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI MicrosoftInternetExplorer4 प्रो. सोमा बंद्योपाध्यायप्रो. सोमा बंद्योपाध्याय ने हाल के दिनों में अपनी लेखनी से चमत्कृत किया है। कई तरह के प्रशासनिक दबावों के बीच...
अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
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