अखिलेश्वर पांडेय की कविताएँ
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI MicrosoftInternetExplorer4 अखिलेश्वर पांडेयअखिलेश्वर पांडेय की कविताओं में माटी की सुगंध तो है ही बोलियों के शब्दों का यथोचित और मार्मिक प्रयोग चकित करता है...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI MicrosoftInternetExplorer4 अखिलेश्वर पांडेयअखिलेश्वर पांडेय की कविताओं में माटी की सुगंध तो है ही बोलियों के शब्दों का यथोचित और मार्मिक प्रयोग चकित करता है...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI भारतीय अमूर्तता के अग्रज चितेरे : रामकुमारपंकज तिवारीभारतीय चित्रकला यहाँ की मिट्टी और जनजीवन की उपज है। इसमें उपस्थित सभी तत्व भारतीय है। उनपर...
Normal 0 false false false false EN-US X-NONE HI विमलेन्दु के गल्पमैं सोशल मीडिया पर, प्रिन्ट मीडिया का कवि हूँ ! --हाँ, मैं कवि-लेखक हूँ. अपने को विशिष्ट, ऊपर और सुरक्षित बनाने के...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI तुषार धवलतुषार धवल की ये कविताएँ बहुत प्यार और गंभीरता के साथ पढ़ने की माँग करती हैं – 'पहर यह बेपहर का' का कवि...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI MicrosoftInternetExplorer4 कम्प्युटर युग में हिन्दीप्रो.जगदीश्वर चतुर्वेदीसरकार की आदत है वह कोई काम जलसे के बिना नहीं करती। सरकार की नजर प्रचार पर होती है...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI स्याह की धुंध में उपजी कथाओं का लोक : मुक्तिबोध की कहानियाँडॉ0 शिवानी जीवन जिसके...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI MicrosoftInternetExplorer4 प्रो. सोमा बंद्योपाध्यायप्रो. सोमा बंद्योपाध्याय ने हाल के दिनों में अपनी लेखनी से चमत्कृत किया है। कई तरह के प्रशासनिक दबावों के बीच...
मुझे न करना याद, तुम्हारा आँगन गीलाहो जाएगाडॉ.विमलेश शर्माखिलने को तैयार नहीं थी, तुलसी भी जिनके आँगन मेंमैंने भर-भर दिए सितारे, उनके मटमैले दामन मेंपीड़ा के संग रास रचाया, आँख भरी तो...
Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI MicrosoftInternetExplorer4 युवा कवि आनन्द गुप्ता के प्रश्न और अग्रज कवि बोधिसत्व के जवाब बोधिसत्व(1) नई सदी में युवाओं की कविता को आप किस दृष्टि से...
अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2009-2022 अनहद कोलकाता by मेराज.