• मुखपृष्ठ
  • अनहद के बारे में
  • रचनाएँ आमंत्रित हैं
  • वैधानिक नियम
  • संपर्क और सहयोग
No Result
View All Result
अनहद
  • साहित्य
    • कविता
    • कथा
    • अनुवाद
    • आलोचना
    • समीक्षा
    • संस्मरण
    • विविध
  • कला
    • सिनेमा
    • पेंटिंग
    • नाटक
    • नृत्य और संगीत
  • लेखक
  • गतिविधियाँ
  • विविध
  • साहित्य
    • कविता
    • कथा
    • अनुवाद
    • आलोचना
    • समीक्षा
    • संस्मरण
    • विविध
  • कला
    • सिनेमा
    • पेंटिंग
    • नाटक
    • नृत्य और संगीत
  • लेखक
  • गतिविधियाँ
  • विविध
No Result
View All Result
अनहद
No Result
View All Result
Home अनुवाद

ध्यान सिंह की कविताएँ

मूल: (डोगरी) ध्यान सिंह  अनुवाद: कमल जीत चौधरी

by Anhadkolkata
September 26, 2026
in अनुवाद, साहित्य
A A
4
Share on FacebookShare on TwitterShare on Telegram
ध्यान सिंह

ध्यान सिंह जी का जन्म 2 मार्च, 1939 ई को जम्मू के घरोटा नामक गाँव में हुआ। वे डोगरी के वरिष्ठ कवि-गद्यकार हैं। विभिन्न विधाओं में इनकी लगभग 75 किताबें प्रकाशित हैं। अपने राजनैतिक स्वर और सामाजिक चेतना के लिए जाने जाते हैं। साहित्य में ही नहीं; बल्कि इनकी जनपक्षधरता इनके व्यवहार में भी देखी जा सकती है। वे श्रमिक संघ के कार्यकर्ता रहे हैं। लोक संस्कृति-संरक्षण हेतु कार्य करते रहे हैं। 2015 में इन्हें ‘परछावें दी लो’ शीर्षक कविता संग्रह पर ‘साहित्य अकादमी,  2014 में ‘बाल साहित्य’ श्रेणी में साहित्य अकादमी पुरस्कार,  2022 में  ‘दीनू भाई पंत सम्मान’ के अलावा डोगरी साहित्य सेवा के लिए 2023 में जम्मू-कश्मीर स्टेट अवॉर्ड मिला है। वे आज भी सक्रिय हैं, और प्रतिदिन कुछ न कुछ अवश्य लिखते हैं।

इन कविताओं का अनुवाद किया है युवा कवि कमल जीत चौधरी ने। साथ ही यह कहना भी  जरूरी है कि कवि का परिचय भी कमल जीत चौघरी ने ही उपलब्ध कराया है।

Related articles

लोचन कोना – 4

सुरेन्द प्रजापति की कविताएँ

ध्यान सिंह 
गाँव व डाक- बटैहड़ा
तहसील व ज़िला- जम्मू, पिन कोड- 181206
जम्मू-कश्मीर
फोन नम्बर-  9419259879

~★~

 ~ मूल: (डोगरी) ध्यान सिंह
                             अनुवाद: कमल जीत चौधरी

| सिर और पैर |

पहाड़ों के सिर नुकीले होते हैं
पहाड़ों के पैर नहीं चलते
रिसते रहते हैं

वैसे मेरे हाथ-पैर चलते रहते हैं

बहुत पहले लोग नंगे पैर ही चलते थे
कुछ लोग चप्पलें सिर पर उठाकर चलते थे
धर्मस्थान पर पैर धोकर जाते थे
मगर पैर सिर पर उठाकर कोई नहीं चलता था
आज भी मनुष्य कदम उठाता, ऊपर देखता
सिर-पैर की सोच रखता है
तो यह समझें कि
सोच-विचार का भी सिर-पैर होता
जो पहले होता था
आज भी है
बस महसूस करने की सोच चाहिए
…
सिर्फ़ कलबूत^ ही नहीं
बसावट के लिए छत्तर^ भी चाहिए।
××

कलबूत^ –  काया/काठ का साँचा, जिस पर रखकर मोची जूते-चप्पल बनाता है।
छत्तर^- छत्र/औज़ार

| छींट |

कोई छींट पड़ी कहीं की
बाहर से अन्दर

चाहे बारिश की ही थी
मगर मुँह से ‘सत्यनाश हो’, फूटा
…
दाग़ जो पड़ा
फिर कभी नहीं छूटा।
××

| दृश्य-कला |

अपनी आँखें होते हुए भी
नहीं देखना
अपने कान होते हुए भी
नहीं सुनना
अपनी बुद्धि होते हुए भी
नहीं समझना
दूसरों का ही देखना, सुनना और समझना-

यह सब दृश्य की अदृश्य कला है।
××

| किंग^|

सबरस रंग हूँ
मैं एक किंग हूँ
सिर्फ़ एक तार से कसी हुई
पतली सी तंद हूँ
छेड़ो तो
बजती हुई तरंग हूँ…
कोई तान लगाऊँ
सांस बजाऊँ
लय-ताल की मुकरियाँ पाऊँ
मेरे सुर-झंकार की चाहत
नित गूँजती है
इन तरंगों को
कोई दीवार नहीं
इकतारी किंग हूँ
मुझे कोई कारागार नहीं
एक तार से कसी हूँ
इसी में आज़ाद हूँ।
××

किंग^ – एक वाद्ययंत्र

| सवाल के लिए खेद है |

कैसे, क्यों और किसलिए ?
इसका उत्तर दें।
_____________________
_____________________
_____________________

पंक्तियाँ खाली छोड़ दी हैं
उत्तर दें
तो कविता होगी।

| चलचित्र |

सावन की झड़ी लगती है
तो कोरा दिन याद आता है
लेटे-लेटे बिस्तर पर करवटें बदलते हुए
घर के अन्दर जब
अन्धेरे में नींद नहीं आती
तो बाहर की चाँदनी याद आती है
याद आती है
तो सपने टूटते हैं
लेटे-लेटे छत के बरगे गिनता रहता हूँ
चिड़िया के बच्चों की
चुरमुर सुनता रहता हूँ
उनके घोंसले को देखकर
आशा के पंख करवटें लेते हैं।

जब बुझता दीवा फड़-फड़ करता है
तो सांस रोक देने वाली हिचकी लग जाती है
मौत के हुंकारों की करवटें सुनता
अपना चलचित्र देखता हूँ…

x x x x x x x x x

कमल जीत चौधरी

अनुवादक का परिचय:
कमल जीत चौधरी हिन्दी के सुपरिचित कवि-गद्यकार-अनुवादक व संपादक हैं। हिन्दी की लगभग साठ साहित्यिक पत्रिकाओं में इनकी कविताएँ, आलेख, अनुवाद और कथाएँ प्रकाशित हुई हैं। इनके दो कविता संग्रह – ‘हिन्दी का नमक’ ( 2016 ), ‘दुनिया का अंतिम घोषणापत्र’ ( 2022 ) और चुनिंदा कविताओं का एक संग्रह; ‘समकाल की आवाज़-चयनित कविताएँ’ (2022) प्रकाशित हुए हैं। इन्होंने जम्मू-कश्मीर की प्रतिनिधि कविताओं के संकलन; ‘मुझे आई डी कार्ड दिलाओ’ ( 2018 ) का संपादन भी किया है। इनकी कविताओं के अनुवाद उड़िया, बंगला, मराठी और अंग्रेज़ी में हुए हैं। इसके अलावा इन्होंने डोगरी की अनेक कविताओं का हिन्दी अनुवाद भी किया है। सुप्रसिद्ध ऑनलाइन पत्रिका ‘पहलीबार’ में ‘परांस’ शीर्षक एक मासिक स्तम्भ लिख रहे हैं, जिसमें जम्मू-कश्मीर के 15 कवियों की कविताई को रेखांकित कर चुके हैं।

सम्पर्क:
कमल जीत चौधरी
गाँव व डाक- काली बड़ी (रेलवे क्रॉसिंग साम्बा के नज़दीक)
तहसील व जिला- साम्बा
पिन कोड- 184121
मेल आई डी- kamal.j.choudhary@gmail.com

Tags: अनहद कोलकाता Anhad Kolkata हिन्दी बेव पत्रिका Hindi Web Magzineअनुवादकमल जीत चौधरीडोगरी के कवि ध्यान सिंहध्यान सिंह की कविताएं
ShareTweetShare
Anhadkolkata

Anhadkolkata

अनहद कोलकाता में प्रकाशित रचनाओं में प्रस्तुत विचारों से संपादक की सहमति आवश्यक नहीं है. किसी लेख या तस्वीर से आपत्ति हो तो कृपया सूचित करें। प्रूफ़ आदि में त्रुटियाँ संभव हैं। अगर आप मेल से सूचित करते हैं तो हम आपके आभारी रहेंगे।

Related Posts

लोचन कोना – 4

लोचन कोना – 4

by Anhadkolkata
October 14, 2026
0

लोकप्रियता और लोकशक्ति के दुश्चक्र में कविता उदास प्रफुल्ल कोलख्यान अभिव्यक्ति नहीं तो व्यक्ति नहीं! व्यक्ति अपने को अस्वीकार किया जाना बहुत मुश्किल से बर्दाश्त कर...

सुरेन्द प्रजापति की कविताएँ

सुरेन्द प्रजापति की कविताएँ

by Anhadkolkata
October 13, 2026
0

सुरेन्द्र प्रजापति सुरेन्द्र प्रजापति की इन कविताओं में प्रेम, मानवीय संबंधों की ऊष्मा, सामाजिक विडंबनाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के संकट की अलग-अलग छवियाँ मिलती हैं। उनकी...

सुशांत सुप्रिय की कविताएँ

सुशांत सुप्रिय की कविताएँ

by Anhadkolkata
October 13, 2026
0

  सुशांत सुप्रिय सुशांत सुप्रिय की इन कविताओं का केंद्रीय स्वर अपने समय की राजनीतिक विडंबनाओं, सामाजिक विसंगतियों, मनुष्य के आंतरिक विखंडन और संवेदनहीन होते समाज...

​ऐनी कार्सन का पेरिस रिव्यु पत्रिका के लिए लिया गया साक्षात्कार

​ऐनी कार्सन का पेरिस रिव्यु पत्रिका के लिए लिया गया साक्षात्कार

by Anhadkolkata
October 12, 2026
0

यह अनुवाद प्रतिष्ठित पत्रिका पेरिस रिव्यु से साभार लिया गया है। यह साक्षात्कार विल ऐटकिन ने साल 2002 में लिया था। अनुवाद: शुभ चक्रबर्ती   ANNE CARSAN...

स्वप्निल श्रीवास्तव की कविताएँ

स्वप्निल श्रीवास्तव की कविताएँ

by Anhadkolkata
October 11, 2026
0

स्वप्निल श्रीवास्तव स्वप्निल श्रीवास्तव की इन कविताओं का वैशिष्ट्य उनकी सहज भाषा, अनुभवजन्य दृष्टि और जीवन के साधारण प्रसंगों में छिपे गहरे अर्थों को पहचानने की...

Next Post
पल्लवी जयराम की सात कविताएँ

पल्लवी जयराम की सात कविताएँ

रोशनी वाला आदमी–विजयशंकर चतुर्वेदी

रोशनी वाला आदमी–विजयशंकर चतुर्वेदी

लोचन कोना

लोचन कोना

Comments 4

  1. Satyanarayan Patel says:
    3 weeks ago

    बहुत सुन्दर कविता है, ख़ूबसूरत अनुवाद है।

    Reply
    • कमल जीत चौधरी says:
      2 weeks ago

      अग्रज, अभिनंदन! हार्दिक धन्यवाद!

      Reply
  2. कमल जीत चौधरी says:
    3 weeks ago

    वाह! यह स्नेह अनमोल है। धन्यवाद! बहुत सुन्दर प्रस्तुति के लिए साधुवाद! प्रिय अग्रज विमलेश भाई, आप और अनहद ज़िंदाबाद रहें!
    प्रिय पाठको के लिए भी शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ।

    शुभेच्छु,
    कमल जीत चौधरी

    Reply
  3. Kalpana Jasro says:
    3 weeks ago

    कवितायों में बिम्ब कमाल के हैं.. कविता जो सोचने पर मजबूर करे, सुन्दर कविताएं…

    Reply

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।

सर्वाधिकार सुरक्षित © 2009-2022 अनहद कोलकाता by मेराज.

No Result
View All Result
  • साहित्य
    • कविता
    • कथा
    • अनुवाद
    • आलोचना
    • समीक्षा
    • संस्मरण
    • विविध
  • कला
    • सिनेमा
    • पेंटिंग
    • नाटक
    • नृत्य और संगीत
  • लेखक
  • गतिविधियाँ
  • विविध

सर्वाधिकार सुरक्षित © 2009-2022 अनहद कोलकाता by मेराज.