राहुल राजेश की नई कविताएँ
राहुल राजेश राहुल राजेश समकालीन कविता के सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनकी प्रस्तुत कविताओं में कोलकाता शहर के अलग-अलग रंग हैं। उन्होंने इस शहर में रहते हुए इस पुराने शहर को न केवल...
राहुल राजेश राहुल राजेश समकालीन कविता के सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनकी प्रस्तुत कविताओं में कोलकाता शहर के अलग-अलग रंग हैं। उन्होंने इस शहर में रहते हुए इस पुराने शहर को न केवल...
गोलगप्पे वाला पूर्व गोपाल नगर मंदिर बाजार, 24 परगना, पश्चिम बंगाल लगभग छः पुस्तों से ये लोग डायमंड हार्बर से एक घण्टे की दूरी पर रह रहे हैं। यह गांव मुझे सचमुच अजूबा...
बाघ से भेंट मृत्युंजय पाण्डेय कवि केदारनाथ सिंह मेरे प्रिय कवियों में से एक हैं । मेरे ही क्या वे बहुतों के प्रिय कवि हैं । बहुतों के आदर्श भी । उनसे...
अर्पण कुमार अर्पण कुमार पिछले ढाई दशकों से कविता की दुनिया में सक्रिय हैं और अब तक उनके तीन संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं जो अपने तेवर और कंटेट के मामले में...
कृष्णमोहन झा के कविता का संसार पृथ्वी और आकाश से लेकर चिटियों तक फैला हुआ है – कवि की स्मृतियाँ कई बार चकित करती हैं और चकित करता है उन स्मृतियों...
सलीका चाहिए आवारगी में (सन्दर्भ ‘आवारा मसीहा’) वंदना चौबे “बहुत मुश्किल है बंजारा मिज़ाजी सलीका चाहिए आवारगी में” ...
विनय कुमार की कविताएँ सहज-सरल होती हुई भी सतर्कता और ध्यान रखकर पढ़ने की मांग करती हैं। वे जिस विषय पर कविता लिख रहे होते हैं उसके बाह्य के साथ अभ्यंतर...
फड़फड़ाती जुगुप्सा, निराशा और भय के बीच कहानीः उपन्यास 'हरामी' यतीश कुमार कुछ किताबें शुरुआती पन्नों से ही पाठकों को अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर देती हैं। अपने अलग मिज़ाज़ और...
बेचूलाल का भूत उर्फ बेलाकाभू पंकज मित्र पंकज मित्र जब से ‘क़यामत से क़यामत तक’ को ‘क्यू एस क्यू टी’ और ‘दिलवाले दुल्हनिया लेजाएँगे’ को डी डी एल जे कहने का...
अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
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