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Home विविध

सबलोग यहाँ बोलते ही हैं

by Anhadkolkata
June 25, 2022
in विविध, विविध, साहित्य
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लेकिन ये अजीब ही बात है कि सबलोग यहाँ बोलते ही हैं, या बोलते रहना चाहते हैं। बोलने वाला सुनना नहीं चाहता, अब वो जमाना नहीं रहा जब लोग बोलते भी थे और सुनते भी थे और परस्पर बोलने और सुनने के बीच से कोई बड़ी बात उभर कर सामने आती थी। अच्छा, आज जितना बोला जा रहा है, पहले क्या इतना बोला जाता था। पहले कम बोलकर लोग अधिक कर गुजरते थे, आज बोलने के नाम पर सभी कमर कसे बैठे हैं और कर गुजरने का वक्त भी इस ‘बोलने ने ही ले लिया है। सोचते हुए एक सोच उभर कर आई कि कितनी पत्रिकाएं, कितनी किताबों के ढेर, और आज के इस इंटरनेटी समय में हजारों ब्लॉग।।। लेकिन रोना वही, साहब कोई देखता तक नहीं, पढ़ने की बात तो दूर है।।
इतने सारे बकवासों के बीच यह बकवास भी क्या उसी बोलने की आवृति..?????…पता नहीं।।।

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