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| मेरी कविताएं ही मेरा वक्तव्य हैं। |
दाड़ो दोई हाथ
हस्ताक्षर: Bimlesh/Anhad
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दाड़ो दोई हाथ
हस्ताक्षर: Bimlesh/Anhad
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शिवानी शांतिनिकेतन शिवानी ‘शांतिनिकेतन’ की यह कहानी केवल एक बेटी के अपने मायके लौटने भर की कथा नहीं कहती, बल्कि रिश्तों में छिपे भय, संकोच, अपराधबोध...
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अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
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आपने अपनी प्रस्तावना में सही लिखा – समकालीन कविताओं के बीच अंबर रंजना की इन कविताओं ने अपने शिल्प की वजह से अचानक चौंका सा दिया. उनके लय में अपनी ताल बिठाने में वक्त लगा जिसकी वजह से एकाधिक बार उनकी कविताओं को पढ़ना पड़ा. पर अंततः उनकी कविताओं से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सका.’दो’ और ’पाँच’ कुछ ज्यादा रुचिं. प्रस्तुत करने के लिए आपका शुक्रिया.उन्हें इन कविताओं के लिये मेरी बधाई प्रेषित करें.
बहुत बढिया है.. दिल को छू गईं…..
naye ka swagat hona hi chahiye !
in kavitaon mein chhayavadi daur ki jhalak milti hai… kavi ke prati meri shubhkamana.
बहुत बढिया है
अंबर की कविताएं सचमुच अलग तरह की हैं…कविता में यह लय की वापसी के संकेत हैं…आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं ..युवाओं को जगह दे कर…बधाई…अरूण शीतांश आरा
sundor kovita
आभार आप मित्रों का….