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| प्रदीप सैनी |
हस्ताक्षर: Bimlesh/Anhad
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| प्रदीप सैनी |
हस्ताक्षर: Bimlesh/Anhad
अनहद कोलकाता में प्रकाशित रचनाओं में प्रस्तुत विचारों से संपादक की सहमति आवश्यक नहीं है. किसी लेख या तस्वीर से आपत्ति हो तो कृपया सूचित करें। प्रूफ़ आदि में त्रुटियाँ संभव हैं। अगर आप मेल से सूचित करते हैं तो हम आपके आभारी रहेंगे।
लोकप्रियता और लोकशक्ति के दुश्चक्र में कविता उदास प्रफुल्ल कोलख्यान अभिव्यक्ति नहीं तो व्यक्ति नहीं! व्यक्ति अपने को अस्वीकार किया जाना बहुत मुश्किल से बर्दाश्त कर...
सुरेन्द्र प्रजापति सुरेन्द्र प्रजापति की इन कविताओं में प्रेम, मानवीय संबंधों की ऊष्मा, सामाजिक विडंबनाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के संकट की अलग-अलग छवियाँ मिलती हैं। उनकी...
सुशांत सुप्रिय सुशांत सुप्रिय की इन कविताओं का केंद्रीय स्वर अपने समय की राजनीतिक विडंबनाओं, सामाजिक विसंगतियों, मनुष्य के आंतरिक विखंडन और संवेदनहीन होते समाज...
यह अनुवाद प्रतिष्ठित पत्रिका पेरिस रिव्यु से साभार लिया गया है। यह साक्षात्कार विल ऐटकिन ने साल 2002 में लिया था। अनुवाद: शुभ चक्रबर्ती ANNE CARSAN...
स्वप्निल श्रीवास्तव स्वप्निल श्रीवास्तव की इन कविताओं का वैशिष्ट्य उनकी सहज भाषा, अनुभवजन्य दृष्टि और जीवन के साधारण प्रसंगों में छिपे गहरे अर्थों को पहचानने की...
अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
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आप जब नींद में होते हैं
तब भी ख़ामोश नहीं होता संगीत
कोई आदिम धुन
आपके सपनों में रास्ता तलाशती है
प्रेम
आपको एक वाद्ययंत्र में तबदील कर देता है।
……!!! सच !
पहली कविता में कुछ 'था' अतिरिक्त लगे.
प्रदीप की काव्यभाषा के अलग से पहचाने जाने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है उसका अर्थवान होना, अपने कथ्य के साथ कुछ इस तरह सहजता से सामने आना कि कविता भीतर उतरे और देर तक गूंजती रहे. 'दुनियादारी से ताल मिलाते ही प्रेम की ताल के भटक जाने के खतरे से सावधान इस कवि को बहुत लंबा सफ़र करता देखना चाहूंगा.
कविता पढवाने के लिए विमलेश का आभार तो बनता ही है.
जो देह नहीं है और मुझे घेरे हुए है…आदमी की असल शिनाख्त खोजते इस कवि को शुभकामनाएं और छापक को धन्यवाद।
भाई बहुत अच्छी प्रेम-पगी कविताएं हैं। बधाई।
बहुत सुंदर एवं सशक्त कवितायेँ , आभार
kavita main pradeep bhayi ki dastak kuchh apane tarah ki hai….unake yahan shorgul nahin hai par kavita ke bhetar shant jheel ki tarah ek halchal hai jo seedhe dil par asar karati hai. pradeep prem ki gahari anubhooti ke kavi hain. …..mujhe bahut pyare hain.
किसी गुम चोट के अंदेशे पर बुला लेते हैं मिस्त्री
जो मुआयने के बाद
औज़ार समेट कर लौट जाता है चुपचाप
जैसे जान गया हो घर का
कौन सा दुःख रिसता है यहाँ
जिसे रोक पाना उसके बस की बात नहीं…..
….
सभी कवितायें सुंदर हैं , प्रदीप जी को बधाई !
प्रदीप सैनी जी की कविताओं से गुजरना जैसे एक जीवन में उतरे हुए कवि के अंतस में उपस्थित जीवनबोध को उसके अद्भुत समूचेपन में साकार कर शब्दों में उकेर देता है उनका ठहराव दुनियावी गणित की तेज गति के मध्य बेहद सुकून देते हुए कह उठता है देखो … दिखी मेरी झलक … मै जीवन का अनंत स्वर हूँ …
प्रदीप वह लिखता है जो उसे लिखना होता है . यह साहस बहुत ही कम लोगों मे होता है. लिखते रहो भाई .
प्रदीप तो अच्छा लिखते ही हैं,उन्हें बधाई ! मैं स्वयं भी बहुत अच्छा लिखता हूँ…..ऐसा लोग कहते हैं……मेरी कवितायें आप लोगों तक और बहुसंख्यक अवाम तक कैसे पहुँच सकती हैं……यदि संभव हो तो मार्गदर्शन कीजियेगा |
भाई कुलीन जी अगर आप वाकई अच्छा लिखते हैं तो आपकी कविताएं हम आवाम तक पहुंचाएंगे। आप अपनी कुछ अच्छी कविताएं मुझे bimlesh.tripathi@saha.ac.in पर भेज दिजिए। कविताएं पसंद आने पर हम अपने ब्लॉग पर छापेंगे। आपका आभार….
सभी मित्रों का बहुत-बहुत अभार…
आप सभी का शुक्रिया जिन्होंने कवितायों को अपना समय दिया ……..आपकी प्रतिक्रियाओं से बेहतर लिखने की ऊर्जा मिली और ये भरोसा भी कि जो थोडा बहुत अभी तक लिख पाया हूँ …..वो प्रयास व्यर्थ नहीं गया……….विमलेश भाई …..आभार |
कुलीन जी ………. विमलेश भाई ने आपको रास्ता बता दिया है ……. अपनी कवितायेँ उन्हें जरूर भेजें |
दुनियादारी से ताल मिलाते ही
प्रेम की लय से भटक जाता हूँ मैं
ऐसा ही कोई लम्हा होता है जब
गिरते हुए सुर को पकड़ने के लिए
ज़िन्दगी से बाहर छलांग लगा सकता है कोई सच्चा साधक
,..बहुत अच्छी लगी आपकी सारी कविताये ,..अच्छा लगा पढकर शुक्रिया आपको ।
आपकी यह पोस्ट आज के (१३ अगस्त, २०१३) ब्लॉग बुलेटिन – प्रियेसी पर प्रस्तुत की जा रही है | बधाई