बहुत दिनों से कथा के लिए एक कहानी भेजने का अपना वादा बार-बार याद करता रहा। कोई कहानी पूरी हुई ही नहीं, भेजता कैसे। बहरहाल एक एसएमएस के जरिए मैंने भाई संतोष के मोबाईल पर एक श्रद्धांजली संदेश भेज दिया।
मार्कण्डेय अकेले ऐसे कथाकार थे, जिनकी कथा में आजादी के बाद का गाँव अपने पूरे यथार्थ के साथ प्रकट हुआ है। आज जब कि गाँव गाँव की तरह नहीं रह गए हैं, ऐसे समय में मार्कण्डेय का जाना नि:शब्द कर गया है हमें।
अबोली की डायरी – जुवि शर्मा
जुवि शर्मा जुवि शर्मा की ‘अबोली की डायरी’ एक ऐसी स्त्री के अंतर्मन की यात्रा है, जो रिश्तों, उपेक्षा, अवसाद, प्रेम, आत्मसम्मान और लेखकीय अस्मिता के...





