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Home विविध

कथाकार मार्कण्डेय का न रहना

by Anhadkolkata
June 25, 2022
in विविध, विविध
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उनसे हमारा परिचय बस एक पाठक साहित्यकार का था। हमारी नजर में वे हमेशा एक बड़े कथाकार रहे। तमाम साहित्यिक गुटों से परे और बहुत सालों से चर्चा में न रह कर भी वे हमारे दिलों में बड़ा ही बने रहे। कवि मित्र संतोष कुमार चतुर्वेदी ने जब यह सूचना दी, लगभग रात के ग्यारह बजे। तो मन सचमुच बेचैन हो गया। अब मैं किससे कहुँ यह बात। पत्नी से कहा—मार्कण्डेय नहीं रहे। कौन मार्कण्डेय….?? पत्नी ने मेरे चेहरे पर आँख गड़ा दिया।

बहुत दिनों से कथा के लिए एक कहानी भेजने का अपना वादा बार-बार याद करता रहा। कोई कहानी पूरी हुई ही नहीं, भेजता कैसे। बहरहाल एक एसएमएस के जरिए मैंने भाई संतोष के मोबाईल पर एक श्रद्धांजली संदेश भेज दिया।
मार्कण्डेय अकेले ऐसे कथाकार थे, जिनकी कथा में आजादी के बाद का गाँव अपने पूरे यथार्थ के साथ प्रकट हुआ है। आज जब कि गाँव गाँव की तरह नहीं रह गए हैं, ऐसे समय में मार्कण्डेय का जाना नि:शब्द कर गया है हमें।

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