जीवन का मर्म कानून से नहीं समझा जा सकता – मधु कांकरिया
मधु कांकरिया जीवन का मर्म कानून से नहीं समझा जा सकता मधु कांकरिया सोचा न था कि वह रात इतनी उदास होगी क्योंकि जिंदगी से लबालब भरे उस...
मधु कांकरिया जीवन का मर्म कानून से नहीं समझा जा सकता मधु कांकरिया सोचा न था कि वह रात इतनी उदास होगी क्योंकि जिंदगी से लबालब भरे उस...
वंदना मिश्रा वंदना मिश्र की कविताओं में उन मामूली स्त्रियों के दुःख दर्ज हैं जो हरदम हमारे आस-पास रहकर हमारे जीवन को आसान बनातीं हैं। यूं तो स्त्री विमर्श के नाम पर...
ममता शर्मा औरत का दिल ममता शर्मा वह औरत का दिल तलाश रही थी। दरअसल एक दिन सुबह सवेरे उसने अख़बार में एक ख़बर पढ़ ली थी जिसके मुताबिक एक जानी-मानी...
सरिता सैल सरिता सैल कवि एवं अध्यापक हैं। खास बात यह है कि कर्नाटक के कारवार कस्बे में रहते हुए और मूलतः कोंकणी और मराठी भाषी होते हुए भी हिन्दी को अपनी...
रंजीता सिंह 'फलक' चुप्पी प्रेम की भाषा है रंजीता सिंह फलक जी का नवीनतम कविता संग्रह है जो वाणी प्रकाशन से छपकर आया है और फरवरी के विश्व पुस्तक मेले में विमोचित...
अनहद कोलकाता एवं बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 4था अनहद कोलकाता सम्मान समारोह 1 मार्च 2025 को विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के सहयोग से सपन्न हुआ जिसमें...
पहली तनख़्वाह विनीता बाडमेरा विनीता बाडमेरा आज फिर उदासी तारी है,यह उदासियां जाती नहीं।करूं तो क्या? कितना मोबाइल,कितना टीवी अब तो इन सबसे भी मन उचट गया है।” उसने मोबाइल...
सोनी पाण्डेय की कविताएँ रोजमर्रा के जीवन अनुभव से उपजी कविताएँ हैं जो हमें उन स्त्रियों के पास ले जाती हैं जो बिखरी हुई चीजों को सहेजती और संवारती रही हैं। हिन्दी...
अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
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