शालिनी सिंह की कविताएँ
शालिनी सिंह ''जीवन देवताओं के साथ बीत रहा है निश्चिंत भेद करना कठिन है कि जीवन में देवता बचे हैं या देवताओं के बीच जीवन बचा है'' यह एक स्त्री का दुख...
शालिनी सिंह ''जीवन देवताओं के साथ बीत रहा है निश्चिंत भेद करना कठिन है कि जीवन में देवता बचे हैं या देवताओं के बीच जीवन बचा है'' यह एक स्त्री का दुख...
गरिमा सिंह "शरीर में श्वेत रक्त कणिकाओं का घटना या बढ़ जाना नही बता सकता है सपनों के मरने की दर और उसे जिन्दा रखने की आदमी की जद्दोजहद को कोशिकाओं के...
दिव्या श्री दिव्या श्री हिन्दी की युवतर कवि हैं और पिछले सालों में अपनी संवेदनात्मक एवं प्रेम विषयक कविताओं से हिन्दी जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इनकी कविताएँ बहुत पहले...
गुंजन उपाध्याय पाठक 'मूर्खों की शौर्य गाथा में कभी ईश्वर इतना मजबूर नहीं था' इन पंक्तियों को लिखने वाली कवि गुंजन उपाध्याय पाठक के सरोकार गहन रूप से समय के सरोकार से...
रुचि बहुगुणा उनियाल रुचि बहुगुणा उनियाल की कविताओं में जो बेचैनी और छटपटाहट है वह हर संवेदनशील मनुष्य के मन में है क्योंकि समय ही ऐसा हो चला है कि आप कई-कई...
अनुपमा कुछ कविताएं ऐसी होती हैं, जिन्हें ठहर कर पढ़ना पड़ता है। अनुपमा की कविताएं भी ऐसी ही हैं। यूं ही नहीं वे भाषा में सुस्ताने की बात करतीं हैं। इसके गहरे...
पायल भारद्वाज पायल भारद्वाज युवतर एवं बेहद संभावनाशील कवि हैं। उनकी कविताओं में स्त्री के दर्द और बेवशी के साथ समय की विडंबना भी झलक रही है। सहज भाषा में लिखी ये...
नेहा नरूका नेहा नरूका का लेखन साहसिक रचनाशीलता का दुर्लभ उदाहरण प्रस्तुत करता है - साथ ही प्रतिबद्ध लेखन अब तक की उनकी रचनाओं में एक कवित्व कौशल के साथ मौजूद है।...
तृष्णा बसाक तृष्णा बसाक बांग्ला साहित्य जगत की एक जानी-मानी और चर्चित कवि एवं कथाकार हैं। उनके लेखन की समृद्धि का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस अल्प वय...
अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
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