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राष्ट्रवाद की लूट है… – अजय तिवारी

                           राष्ट्रवाद की लूट है...                         अजय तिवारी       अजय तिवारीराष्ट्र की सत्ता प्राचीन है, राष्ट्रवाद की अवधारणा आधुनिक. राष्ट्र का अस्तित्व भूभाग-आबादी-भाषा-संस्कृति-इतिहास की साझेदारी पर निर्भर है, राष्ट्रवाद का इस विश्वास...

आजादी के बाद हिन्दी को लेकर हुए मजाक पर बनी उम्दा फिल्म – ‘हिन्दी मिडियम’ – शिवानी गुप्ता

Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI MicrosoftInternetExplorer4 शिवानी गुप्ताशिवानी गुप्ता युवा प्राध्यापक और आलोचक हैं, समकालीन महिला उपन्यासकारों पर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से शोध किया है और समकालीन मुद्दों के...

पहली कहानी – विजय शर्मा ‘अर्श’

 विजय शर्मा ‘अर्श’कहानियों में विषय और शिल्प को लेकर लागातार प्रयोग होते रहे हैं –  हिन्दी कहानी ने इस मायने में एक लंबी यात्रा की है। कहानी का इतिहास बताता है कि...

कस्बाई औरतों के किस्से – शेखर मल्लिक

शेखर मल्लिक     युवा कथाकार एवं प्रलेसं से जुडाव    हंस, प्रगतिशील वसुधा, अन्यथा, परिकथा, कथादेश, पाखी, जनपथ, शुक्रवार, दूसरी परम्परा, लमही,संवेद, रचना समय आदि में कहानियाँ. एक कहानी संग्रह (अस्वीकार और अन्य कहानियाँ)...

निडरता की ओर छोटी-सी यात्रा : आरती

आरतीआरती को सबसे अधिक मैं एक कुशल सम्पादक के रूप में जानता हूँ – उनसे जब कोई संपर्क नहीं था तब भी उनके द्वारा संपादित त्रैमासिक पत्रिका समय के साखी मेरे पास...

लवली गोस्वामी की कविताएँ

Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI लवली गोस्वामीलवली गोस्वामी की कविताएँ ही उनका परिचय हैं –  कभी उनका इतर परिचय जानने का अवसर न मिला। फेसबुक पर सक्रिय कम महिलाएँ...

देशप्रेम किसे कहते हैंः शंभुनाथ

देशप्रेम किसे कहते हैंशंभुनाथशंभुनाथअतीत से आलोचनात्मक संबंध तोड़ना और उससे संकीर्ण राजनैतिक संबंध स्थापित करना अंध-राष्ट्रवाद का लक्ष्य होता है। संस्कृति के सुवासित धार्मिक वस्त्रों के भीतर बर्बरता छिपी होती है। दरअसल,...

भोजपुरी का दुखः मृत्युंजय पाण्डेय

Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI भोजपुरी का दुखमृत्युंजय पाण्डेयमृत्युंजय पाण्डेय युवा आलोचक और प्राध्यापक हैं। हिन्दी की बोली भोजपुरी को भाषा की मान्यता मिलनी चाहिए या नहीं इसको लेकर...

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