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बाकलम खुद कुमारिल, खुद प्रभाकर : हिंदी के नामवर – प्रफुल्ल कोलख्यान

Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI MicrosoftInternetExplorer4 बाकलम खुद कुमारिल, खुद प्रभाकर : हिंदी के नामवरप्रफुल्ल कोलख्यान ‘समाज का संगठन आदिकाल से आर्थिक भीत्ति पर होता आ रहा है। जब...

भरत प्रसाद की कविताएँ

भरत प्रसादभरत प्रसाद ने कविता, कथा और आलोचना तीनों ही विधाओं में लागातार श्रेष्ठ लेखन किया है। किसी भी रचनाकार की लागातार सक्रियता मुझे बेहद आकर्षित करती रही है। भरत जी न...

कोलकाता में अभी मनुष्य बसते हैं – शंभुनाथ

कोलकाता में अभी मनुष्य बसते हैंशंभुनाथ  शंभुनाथमैंने 1970 के दशक में कोलकाता के लेखकों का प्रचंड व्यवस्था-विरोध देखा है, जो अब एक मरती हुई भावना है। हिंदी और बांग्ला लेखकों के बीच...

दीप्ति कुशवाह की लंबी कविता – निर्वीर्य दुनिया के बाशिंदे

Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI MicrosoftInternetExplorer4 एक अलग दुनिया की थाह लेती कवितादीप्ति कुशवाहकविता की दुनिया में अभी भी बहुत-से ऐसे विषय और प्रदेश हैं, जिन पर हमारी सामाजिक...

सुशांत सुप्रिय की कविताएँ

Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI MicrosoftInternetExplorer4 सुशांत सुप्रियसुशांत सुप्रिय की कविताएँ बहुत समय से पढ़ता रहा हूँ। सुशांत के विषय चयन से लेकर शब्द चयन तक असाधारण रूप से...

विहाग वैभव की नई कविताएँ

Normal 0 false false false EN-US X-NONE HI MicrosoftInternetExplorer4 विहाग वैभवपहली बार विहाग वैभव की कविताओं पर नजर फेसबुक पर ही पड़ी। कई कविताएं पढ़ने के बाद लगा कि इस कवि में...

हेमन्त देवलेकर की कविताएँ

हेमन्त देवलेकर यह सुखद संयोग था कि नीलांबर कोलकाता द्वारा साल 2016 आयोजित एक साँझ कविता की – 2 में हेमन्त दा से मिलने और उनकी कविताएँ सुनने का मौका मिला। सहज ही...

मिथिलेश कुमार राय की कुछ नई कविताएँ

मिथिलेश कुमार रायमिथिलेश माटी के कवि हैं। उनकी कविताओं में उनका अंचल, घर-परिवार के साथ ही वह बड़ा संसार भी बसता है, जो तेजी से बदल रहा है - एक संजीदा कवि...

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