जिगरी यार – लुइगी पिरांदेलो
जिगरी यार मूल लेखक : लुइगी पिरांदेलो लुइगी पिरांदेलो अनुवाद : सुशांत सुप्रिय गिगी मियर ने उस सुबह एक पुराना...
जिगरी यार मूल लेखक : लुइगी पिरांदेलो लुइगी पिरांदेलो अनुवाद : सुशांत सुप्रिय गिगी मियर ने उस सुबह एक पुराना...
मेरी ढाका डायरी – मधु कांकरिया ( एक दिलचस्प अंश ) मधु कांकरिया वरिष्ठ कथाकार मधु कांकरिया की 'मेरी ढाका...
रूपा सिंह रूपा सिंह की कहानियाँ हमें मानवीय संबंधों और उनकी विसंगतियों की ओर ले जाती हैं और हमें पता...
तीरगी में रौशनी ग़ज़ल संग्रह का लोकार्पण आज दिनांक 15/04/2025 को काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी के हिन्दी विभाग के रामचंद्र...
जयमाला जयमाला की कविताएं स्तरीय पत्र - पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती रहीं हैं। प्रस्तुत कविताओं में स्त्री मन के...
शालू शुक्ला कई बार कविताएँ जब स्वतःस्फूर्त होती हैं तो वे संवेदना में गहरे डूब जाती हैं - हिन्दी कविता...
ममता जयंत ममता जयंत की कविताओं में सहज जीवन के चित्र हैं जो आकर्षित करते हैं और एक बेहद संभावनाशील...
डॉ. शोभा जैन डॉ. शोभा जैन इंदौर में रहती हैं एवं अग्निधर्मा पत्रिका का संपादन करती हैं। स्त्री विमर्श से...
चित्रा पंवार चित्रा पंवार संभावनाशील कवि हैं और इनकी कविताओं से यह आशा बंधती है कि हिन्दी कविता के भविष्य...
अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
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