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| श्रीकांत दुबे -09873964044 |
हस्ताक्षर: Bimlesh/Anhad
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| श्रीकांत दुबे -09873964044 |
हस्ताक्षर: Bimlesh/Anhad
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बेबी शॉ बेबी शॉ की कविताएँ सहज मन से उपजी कोमल गान की तरह हैं जो बहुत देर तक हमारे जेहन में ठहर कर हमें कुछ...
जयमाला जयमाला की कविताएं स्तरीय पत्र - पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती रहीं हैं। प्रस्तुत कविताओं में स्त्री मन के अन्तर्द्वन्द्व के साथ - साथ गहरी...
शालू शुक्ला कई बार कविताएँ जब स्वतःस्फूर्त होती हैं तो वे संवेदना में गहरे डूब जाती हैं - हिन्दी कविता या पूरी दुनिया की कविता जहाँ...
अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
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बहुत अच्छी कविताएं… बधाई
अरूण अभिषेक
प्यार में आदमी अभी तक जो नहीं हो पाया उसी को चिन्हित करती कितनी ताजादम कविताएं …वधाई !
एक अलग तरह का अहसास ,
बिलकुल हमारे अपने पास
कोई है जो बोल रहा है
हमें हमारी ही तरह से महसूस रहा है !
बहुत उम्दा,सरल शब्दों में सम्पूर्ण अभिव्यक्ति !
सरल शब्द,निखरी अभिव्यक्ति और सामान्य कथ्य शैली अपने आप में लेखन की नई आगज़ है |
भाई श्रीकांत की कविताओं में उनकी कहानियों सा 'गुरूत्वाकर्षण' है
बधाई
प्रदीप जिलवाने
nice collection