आबल-ताबल : आठवीं : ललन चतुर्वेदी
आबल-ताबल – ललन चतुर्वेदी परसाई जी की बात चलती है तो व्यंग्य विधा की बहुत याद आती है। वे व्यंग्य के शिखर हैं - उन्होंने इस विधा को स्थापित किया,...
आबल-ताबल – ललन चतुर्वेदी परसाई जी की बात चलती है तो व्यंग्य विधा की बहुत याद आती है। वे व्यंग्य के शिखर हैं - उन्होंने इस विधा को स्थापित किया,...
सुरेन्द्र प्रजापति सुरेन्द्र की कविताएँ भूख, अभाव और शोषण के दुःख से पैदा हुई हैं - यहाँ मैं जानबूझकर ‘लिखी गई हैं’ नहीं कह रहा क्योंकि इस तरह की कविताएँ लिखी नहीं...
आबल-ताबल – ललन चतुर्वेदी परसाई जी की बात चलती है तो व्यंग्य विधा की बहुत याद आती है। वे व्यंग्य के शिखर हैं - उन्होंने इस विधा को स्थापित किया,...
ज्ञान प्रकाश पाण्डे की ग़ज़लें एक ओर स्मृतियों की मिट्टी में धँसी हुई हैं तो दूसरी ओर वर्तमान समय की नब्ज पर उंगली भी रखतीं है। उनकी कई ग़ज़लों के शेरों से...
आबल-ताबल – ललन चतुर्वेदी परसाई जी की बात चलती है तो व्यंग्य विधा की बहुत याद आती है। वे व्यंग्य के शिखर हैं - उन्होंने इस विधा को स्थापित...
हर वह व्यक्ति जो अपने मन की बात अपनी भाषा में लिखकर लयबद्ध अभिव्यक्त करता है वह कवि होता है। यहाँ ठीक उसी तरह भांति-भांति के लोग हो सकते हैं जिस तरह...
आबल-ताबल – ललन चतुर्वेदी परसाई जी की बात चलती है तो व्यंग्य विधा की बहुत याद आती है। वे व्यंग्य के शिखर हैं - उन्होंने इस विधा को स्थापित किया,...
पिछले 7 मार्च सम्मानीय साहित्यकार पद्मश्री डॉ कृष्णबिहारी मिश्र हमें अकेला छोड़ गए। वे बंगाल की पत्रकारिता के एक स्तंभ थे। आदरणीय कृष्णबिहारी मिश्र जी सदैव स्मृतियों में रहेंगे - कलाकार...
रेखा चमोली की कविताएँ स्थानीय दिखती हुई भी आदमी की संवेदनाओं से जुड़कर इसलिए वैश्विक हो जाती हैं की वे स्त्री विमर्श के बने बनाये ढांचे को तोड़कर समानता की ऐसी...
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