रंजीता सिंह ‘फलक’ की नई कविताएँ
रंजीता सिंह 'फलक' चुप्पी प्रेम की भाषा है रंजीता सिंह फलक जी का नवीनतम कविता संग्रह है जो वाणी प्रकाशन से छपकर आया है और फरवरी के विश्व पुस्तक मेले में विमोचित...
रंजीता सिंह 'फलक' चुप्पी प्रेम की भाषा है रंजीता सिंह फलक जी का नवीनतम कविता संग्रह है जो वाणी प्रकाशन से छपकर आया है और फरवरी के विश्व पुस्तक मेले में विमोचित...
अनहद कोलकाता एवं बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 4था अनहद कोलकाता सम्मान समारोह 1 मार्च 2025 को विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के सहयोग से सपन्न हुआ जिसमें...
पहली तनख़्वाह विनीता बाडमेरा विनीता बाडमेरा आज फिर उदासी तारी है,यह उदासियां जाती नहीं।करूं तो क्या? कितना मोबाइल,कितना टीवी अब तो इन सबसे भी मन उचट गया है।” उसने मोबाइल...
सोनी पाण्डेय की कविताएँ रोजमर्रा के जीवन अनुभव से उपजी कविताएँ हैं जो हमें उन स्त्रियों के पास ले जाती हैं जो बिखरी हुई चीजों को सहेजती और संवारती रही हैं। हिन्दी...
आधुनिक हिंदी कविता को समृद्ध करती कविताएँ राम पांडेय इक्कीसवीं सदी के बीते दो दशकों में अपनी अलग पहचान बनाने वाले युवा कवियों में सुशांत सुप्रिय का नाम प्रमुख है...
हंसा दीप का नाम प्रवासी रचनकारों में महत्वपूर्ण है। वे दीर्घ काल से रचनारत हैं और हिन्दी कहानी के क्षेत्र में एक सार्थक हस्तक्षेप किया है। अनहद कोलकाता पर प्रस्तुत है उनकी...
ललन चतुर्वेदी ललन चतुर्वेदी के नए संग्रह यह देवताओं के सोने का समय है का केन्द्रीय भाव देवता नहीं बल्कि आदमी है। वह आदमी जिसे होना तो आदमी था लेकिन वह किसी...
समकालीन कविता के एक महत्त एवं जरूरी कवि, कथाकार, आलोचक एवं चिंतक जितेन्द्र श्रीवास्तव का आज जन्म दिन है। अनहद कोलकाता की ओर से महत्त कवि को ढेरों बधाइयाँ एवं लंबे सृजनात्मक...
हिन्दी भाषा के महत्वपूर्ण कवि 'अभिज्ञात' कथा एवं कविता लेखन के क्षेत्र में लगभग चार दशकों से सक्रिय हैं तथा महत्वपूर्ण योगदान दे रहें है । वे कला की अन्य विधाएं...
अनहद कोलकाता साहित्य और कलाओं की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है। डिजिटल माध्यम में हिंदी में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘अनहद कोलकाता’ का प्रकाशन 2009 से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है। यह पत्रिका लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील चेतना के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पूर्णतः अव्यवसायिक है। इसे व्यक्तिगत संसाधनों से पिछले 12 वर्षों से लागातार प्रकाशित किया जा रहा है। अब तक इसके 500 से भी अधिक एकल अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
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