जैसे एक लाल-पीली
तितली
बैठ गई हो
कोरे कागज पर नीर्भिक
याद दिला गई हो
बचपन के दिन….
ललन चतुर्वेदी के सद्य प्रकाशित कविता संग्रह ‘आवाज घर’ से सात कविताएँ
ललन चतुर्वेदी की कविताओं की सहजता एवं संवेदनशीलता तो आकर्षित करती ही है, उन कविताओं के विषय भी कम मानीखेज नहीं है। ललन जी अपनी...





